इनका अर्थ
राहु काल
राहु काल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय होता है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और वार के अनुसार उनमें से एक भाग राहु काल होता है: रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा। परंपरा के अनुसार लोग इस समय यात्रा, ख़रीदारी या समारोह जैसे नए काम शुरू नहीं करते। रोज़मर्रा का काम सामान्य रूप से चलता रहता है।
यमगण्ड
यमगण्ड भी दिन के आठ बराबर भागों में से एक है, जो वार से तय होता है। परंपरा इसे राहु काल की तरह देखती है: ऐसा समय जब लोग नया काम शुरू न करना पसंद करते हैं।
गुलिक काल
गुलिक काल (गुलिकाई) दिन का तीसरा ऐसा भाग है जो वार से तय होता है। बहुत से लोग इसमें भी महत्वपूर्ण काम शुरू नहीं करते। इससे जुड़ी मान्यताएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त दिन का मध्य भाग है। दिन को लगभग 48 मिनट के पंद्रह मुहूर्तों में बाँटा जाता है, और दोपहर को केंद्र में रखने वाला आठवाँ मुहूर्त अभिजीत है। परंपरा में इसे काम शुरू करने का शुभ समय माना जाता है। कई पंचांग बुधवार को इसका उपयोग नहीं करते।
सूर्योदय और सूर्यास्त
पंचांग का दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से शुरू होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त आपके शहर और मौसम के साथ बदलते हैं, और इस पेज का हर समय इन्हीं से नापा जाता है। इसीलिए समय आपके चुने हुए स्थान के लिए निकाला जाता है।
तिथि
तिथि एक चंद्र दिन है। जब भी चंद्रमा आकाश में सूर्य से 12 अंश और आगे बढ़ता है, नई तिथि शुरू होती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। तिथि घड़ी के अनुसार नहीं चलती: वह दोपहर में शुरू होकर अगली सुबह ख़त्म हो सकती है। सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही आमतौर पर उस दिन की तिथि कहलाती है।
पक्ष
पक्ष का अर्थ है चंद्र मास का आधा भाग। शुक्ल पक्ष उजला पक्ष है, अमावस्या से पूर्णिमा तक, जब चंद्रमा हर रात बढ़ता है। कृष्ण पक्ष अँधेरा पक्ष है, पूर्णिमा से अमावस्या तक, जब वह घटता है। हर पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं।
नक्षत्र
नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के मार्ग पर 27 तारा-समूह हैं, हर एक मार्ग का बराबर हिस्सा। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। सूर्योदय के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही उस दिन का नक्षत्र है। किसी व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वह उसका जन्म नक्षत्र है।
योग
पंचांग में योग सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को जोड़कर निकाली गई संख्या है, जिसे 27 नाम वाले भागों में बाँटा जाता है। यह पंचांग के पाँच अंगों में से एक है। इसका व्यायाम वाले योग से कोई संबंध नहीं है।
करण
करण तिथि का आधा भाग है, इसलिए आमतौर पर एक दिन में दो करण होते हैं। कुल ग्यारह नाम हैं। उनमें से विष्टि (भद्रा) को परंपरा में नए काम की शुरुआत के लिए टाला जाता है।
पंचांग
पंचांग का अर्थ है "पाँच अंग"। ये पाँच अंग हैं तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। पाँचों सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से निकलते हैं, इसलिए किसी भी स्थान और किसी भी दिन के लिए इनकी गणना की जा सकती है।